Shero Shayari Hindi Mai



 Best Sher Shayari with images


सदाक़त हो तो दिल सीनों से खिंचने लगते हैं वाइ’ज़

हक़ीक़त ख़ुद को मनवा लेती है मानी नहीं जाती!


जरूरी नही कुछ तोडने के लिये पथ्थर ही मारा जाए ।

लहजा बदल के बोलने से भी बहोत कुछ टूट जाता है ।।


मुझे मजबूर करती हैं यादें तेरी वरना

शायरी करना अब मुझे अच्छा नहीं लगता!


ढल रही हैं ज़िन्दगी बुझ गई शमा परवाने की

अब वजह जीने की नहीं मिलती यहाँ

ज़नाब आपको अब भी पड़ी हैं मुस्कराने की!


शायरों की बस्ती में कदम रखा तो जाना

गमों की महफिल भी कमाल की जमती है!


अकेले हम बूँद हैं,

मिल जाएं तो सागर हैं

अकेले हम धागा हैं,

मिल जाएं तो चादर हैं

अकेले हम कागज हैं,

मिल जाए तो किताब हैं!


पुछ कर देख अपने दिल से की हमे भुलना चहाता है क्या

अगर उसने हा कहा तो कसम से महोब्बत करना छोङ देगे!


आज कुछ और नहीं बस इतना सुनो

मौसम हसीन है लेकिन तुम जैसा नहीं!


गलतफहमी की गुंजाईश नहीं सच्ची मोहब्बत में

जहाँ किरदार हल्का हो,

कहानी डूब ही जाती है!


तन्हाइयों का एक अलग ही सुरुर होता है

इसमें डर नहीं होता.किसी से बिछड जाने का!


जिंदगी बहुत कुछ सिखाती है ,

कभी हँसाती है तो कभी रुलाती है ,

पर जो हर हाल में खुश रहते हैं ,

जिंदगी उन्ही के आगे सर झुकाती है।


थोड़ा मैं ,

थोड़ी तुम,

और थोड़ी सी मोहब्बत

बस इतना काफी है,

जीने के लिये…!


हदे शहर से निकली तो गाँव गाँव चली,

कुछ यादें मेरे संग पांव-पांव चली,

सफ़र जो धुप का हुआ तो तजुर्बा हुआ,

वो जिंदगी ही क्या जो छाँव छाँव चली।


मुझे अपनी वफादारी पे कोई शक नही होता

मैं खून-ए-दिल मिला देता हु जब झंडा बनाता हु!


इरादे बाँधता हूँ सोचता हूँ तोड़ देता हूँ

कही ऐसा ना हो जाए कही वैसा ना हो जाए!


ये मंजिलें बड़ी जिद्दी होती हैं,

हासिल कहां नसीब से होती हैं।

मगर वहां तूफान भी हार जाते हैं,

जहां कश्तियां जिद्द पे होती हैं।।


तुम से मिल कर इमली मीठी लगती है….

तुम से बिछड़ कर शहद भी खारा लगता है!


नशा था उनके प्यार का

जिसमें हम खो गए

उन्हें भी पता नहीं चला कि कब हम उनके हो गए!


नशा हम करते हैं

इलज़ाम शराब को दिया जाता है

मगर इल्ज़ाम शराब का नहीं उनका है

जिनका चेहरा हमें हर जाम में नज़र आता है!


अपनों के दरमियां सियासत फ़िजूल है

मक़सद न हो कोई तो बग़ावत फ़िजूल है।

​​रोज़ा,

नमाज़,

सदक़ा-ऐ-ख़ैरात या हो हज

माँ बाप ना खुश हों,

तो इबादत फ़िजूल है।


अपने नहीं तो अपनों का साथ क्या होगा

सपनों में हो उनसे मुलाकात तो क्या होगा

सुबह से शाम तक हमें इंतजार हो जिनका

वादों में कटे रात तो रात का क्या होगा!


खींच कर आज मुझे मेरे घर लायी है

मेरे बचपन की यादे मेरे मन में समायी है

अब ना चाहिए मुझे दौलत इस दुनिया की

मेरी माँ की मोहब्बत मेरी उम्र भर की कमाई है!


एक आँसू कह गया सब हाले दिल का

मै समझती थी ये ज़ालिम बे जुबान है!


तुमसे क्या गिला करना गुजारिश है मिला करना

जिंदगी मेरी आसान होगी बस साँसों में घुला करना!


दिल होना चाहिए जिगर होना चाहिए

आशिकी के लिए हुनर होना चाहिए

नजर से नजर मिलने पर इश्क नहीं होता

नजर के उस पार भी एक असर होना चाहिए!


Sher Shayari Hindi mai


चले गए है दूर कुछ पल के लिए

मगर करीब है हर पल के लिए

किसे भुलायेंगे आपको एक पल केलिए

जब हो चूका है प्यार उम्र भर के लिए!


लडते रहते हैं दो मुल्कों की तरह तुम्हारे लिए

तुम्हारी क्या खता है इसमें तुम हो ही कश्मीर सी सुंदर!


मुस्कुराने की आदत भी कितनी महंगी पड़ी हमें…

छोड़ गया वो ये सोच कर कि हम जुदाई में भी खुश हैं!


कैसे लिखोगे मोहब्बत की किताब

तुम तो करने लगे पल-पल का हिसाब!


दीवाने है तेरे नाम के इस बात से इंकार नहीं

कैसे कहें कि तुमसे प्‍यार नहीं

कुछ तो कसूर है आपकी आखों का

हम अकेले तो गुनहगार नहीं!


शायरी नही आती मुझे बस हेल दिल सुना रही हूँ

बेवफाई का इलज़ाम है मुझपर फिर भी गुनगुना रही हूँ

क़त्ल करने वालो ने कातिल भी हमे ही बना दिया

खफा नही उससे फिर भी मै बस उसका दामन बचा रही हूँ!



कांच जैसे होते हैं हम तन्हां जैसे लोगों के दिल,

कभी टूट जाते हैं और कभी तोड़ दिए जाते हैं!


मौसम बदल गये जमाने बदल गये

लम्हों में दोस्त बरसों पुराने बदल गये

दिन भर रहे जो मेरी मौहब्बत की छॉंव में

वो लोग धूप ढलते ही ठिकाने बदल गये!


हम अल्फाजो को ढूढते रह गए

और वो आँखों से गज़ल कह गए!


खाली हो चला दिल अहसासों से

न दिल कुछ कहता है न कलम कुछ लिखती है!


कुछ लोग जो ख़ामोश हैं ये सोच रहे हैं

सच बोलेंगे जब सच के ज़रा दाम बढ़ेंगे!


मुस्कुराते हैं तो बिजली सी गिरा देते हैं

बात करते हैं तो दीवाना बना देते हैं

हुस्न वालों की नजर कयामत से कम नहीं

आग पानी में भी नजरों से लगा देते हैं!


हर हक़ीक़त है एक हुस्न ‘हफ़ीज़’

और हर हुस्न इक हक़ीक़त है!


तु है सुरज तुझे मालुम कहां रात का दुख

तु किसी रोज मेरे घर मे उतर शाम के बाद!


हम तो वो हे जो तेरी बातेँ सुन कर तेरे हो गए थे

वो और होंगे जिन्हे मोहब्बत चेहरो से होती हो!


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